नई दिल्ली : लगातार कई राज्यों में चुनावी हार झेल चुकी कांग्रेस के लिए तमिलनाडु से भी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके ने कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए सत्ता में हिस्सेदारी की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।
डीएमके नेताओं का कहना है कि तमिलनाडु की जनता सत्ता-साझेदारी जैसे प्रयोग को स्वीकार नहीं करेगी। यह किसी नेता या कार्यकर्ता की सोच नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य से जुड़ा सवाल है। डीएमके का साफ कहना है कि तमिलनाडु में गठबंधन के तहत सत्ता में भागीदारी की संस्कृति कभी स्वीकार्य नहीं रही है।

न्यूज़18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जुबानी जंग उस वक्त तेज हुई जब डीएमके सांसद कनिमोझी को राहुल गांधी से बातचीत के लिए भेजा गया। चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कनिमोझी ने कहा कि वह संसद सत्र में भाग लेने के लिए दिल्ली जा रही हैं और वहां राहुल गांधी से मुलाकात करेंगी।
इस बीच डीएमके, राहुल गांधी द्वारा टीवीके प्रमुख विजय से संपर्क साधने और संभावित सत्ता-साझाकरण के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस से नाराज़ बताई जा रही है। हालांकि डीएमके के वरिष्ठ सांसदों ने इस विवाद को ज्यादा तूल देने से इनकार किया और कहा कि यह गठबंधन पिछले 22 वर्षों से मजबूती से कायम है।

विवाद का दूसरा सिरा कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर से जुड़ा है। टैगोर बीते कुछ दिनों से डीएमके नेताओं के बयानों से नाराज़ दिखे और लगातार पलटवार करते रहे। यह बात डीएमके नेतृत्व को नागवार गुज़री।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए डीएमके नेता जी. थलपति ने यहां तक कह दिया कि पार्टी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विरुधनगर के सांसद मणिकम टैगोर और करूर की सांसद ज्योतिमणि को अगले लोकसभा चुनाव में टिकट न मिले।
थलपति ने कहा कि ये सांसद इंडिया ब्लॉक के समर्थन से चुने गए, लेकिन कांग्रेस विधायकों को सत्ता में हिस्सेदारी देने की मांग से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इंडिया ब्लॉक का अस्तित्व एमके स्टालिन, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं पर निर्भर करता है।

डीएमके नेताओं के बयान पर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में कांग्रेस नेतृत्व को गठबंधन सहयोगियों की भाषा पर ध्यान देना चाहिए।
एक सर्वदलीय बैठक के दौरान टैगोर ने कहा,
“हम इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करते। सहयोगी दलों को भी सावधान रहना चाहिए।”
हालांकि बाद में डीएमके की ओर से विवाद को शांत करने के संकेत भी दिए गए। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि कांग्रेस की चिंताओं का समाधान जमीनी स्तर पर किया जा सकता है।

डीएमके ने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस को विभिन्न निगमों और बोर्डों में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। राज्य में लगभग 40 निगम हैं, जहां सीटों के बंटवारे पर विचार किया जा सकता है। यह नया फॉर्मूला डीएमके विधायक जी. थलपति के बयान के कुछ दिनों बाद सामने आया है।
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