Sutralok / Sun, Mar 29, 2026
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव रविवार को नोएडा-दादरी में ‘समाजवादी समता भाईचारा रैली’ करने जा रहे हैं। इस रैली को सपा के चुनावी अभियान की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अखिलेश यादव ने अपने मिशन 2027 का आगाज नोएडा से ही क्यों किया?
नोएडा क्यों बना सियासी लॉन्चपैड?
दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुर्जर वोटबैंक बेहद अहम भूमिका निभाता है। गाजियाबाद, नोएडा, दादरी, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, संभल और कैराना जैसी करीब 24 सीटों पर गुर्जर मतदाता निर्णायक माने जाते हैं। इन सीटों पर 20 हजार से लेकर 70 हजार तक गुर्जर वोट मौजूद हैं।
2014 के बाद से यह वोटबैंक काफी हद तक भारतीय जनता पार्टी के साथ रहा है। लेकिन अब समाजवादी पार्टी इस समीकरण को बदलने की कोशिश में जुट गई है।
गुर्जर वोटबैंक में सेंध की रणनीति
सपा इस बार ‘मुस्लिम-गुर्जर’ गठजोड़ के जरिए पश्चिमी यूपी में नई सामाजिक इंजीनियरिंग बनाने की तैयारी में है। पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोट के साथ गुर्जर समुदाय को जोड़कर मजबूत समीकरण खड़ा करना चाहती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह रणनीति कहीं न कहीं जयंत चौधरी के प्रभाव को बैलेंस करने की भी कोशिश हो सकती है, क्योंकि पश्चिमी यूपी में उनका जाट वोटबैंक मजबूत माना जाता है।
क्या सपा को मिलेगा फायदा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गुर्जर समाज सपा की ओर झुकेगा?
अब तक यह समुदाय भाजपा का कोर वोटर रहा है, लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों के चलते सपा को उम्मीद है कि वह इसमें सेंध लगा सकती है।
2027 का सेमीफाइनल शुरू?
नोएडा की यह रैली सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 के चुनावी महासंग्राम का ट्रेलर मानी जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सपा की यह रणनीति जमीन पर कितना असर दिखाती है।
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