Sutralok / Wed, Feb 18, 2026
लखनऊ:मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (BSP) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अकेले लड़ेगी। बुधवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने गठबंधन की अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि बसपा किसी भी पार्टी से हाथ नहीं मिलाएगी।
उन्होंने कहा कि मीडिया में चल रही गठबंधन की खबरें पूरी तरह फर्जी, मनगढ़ंत और भ्रामक हैं। यह सब बसपा को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा है।
गठबंधन की अटकलों पर सख्त रुख
हाल के दिनों में बसपा और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं सामने आई थीं।
इसके अलावा अखिलेश यादव ने भी इशारों-इशारों में बसपा से पुराने रिश्तों का हवाला देते हुए गठबंधन की संभावना जताई थी।
इस पर मायावती ने दो टूक कहा—
“कुछ स्वार्थी नेता और मीडिया जानबूझकर यह अफवाह फैला रहे हैं कि बसपा गठबंधन में चुनाव लड़ेगी। यह पूरी तरह झूठ है।”
टाइप-8 बंगले पर भी दी सफाई
दिल्ली में हाल ही में अलॉट हुए टाइप-8 बंगले को लेकर उठे सवालों पर भी मायावती ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों से पहले कई बंगले नहीं लिए गए या छोड़ दिए गए थे। अब जो टाइप-8 का उपयुक्त बंगला मिला है, उसे स्वीकार किया गया है।

उन्होंने 2 जून 1995 के लखनऊ के चर्चित लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना के बाद से उन्हें विशेष सुरक्षा मिली हुई है, जो समय के साथ और बढ़ी है।
मायावती ने कहा कि इस मुद्दे पर घिनौनी राजनीति करना ठीक नहीं है।
“कटी पतंग जैसी उड़ान न भरें”
बसपा प्रमुख ने मीडिया को नसीहत देते हुए कहा कि इस तरह की “कटी पतंग जैसी उड़ान” भरकर खुद का मजाक न बनाएं।
उन्होंने याद दिलाया कि 9 अक्टूबर 2025 को कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित महारैली में 2027 चुनाव अकेले लड़ने का फैसला पहले ही सार्वजनिक किया जा चुका है।
सपा-भाजपा पर निशाना
मायावती ने समाजवादी पार्टी और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों की सोच संकीर्ण और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विरोधी रही है।
उन्होंने कहा कि इन पार्टियों का बसपा से गठबंधन करने का मकसद केवल राजनीतिक स्वार्थ होता है, जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है।
2007 की जीत दोहराने का लक्ष्य
बसपा सुप्रीमो ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मनगढ़ंत खबरों पर ध्यान न दें और “हाथी की मस्त चाल” चलते रहें।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, विरोधियों के साम-दाम-दंड-भेद जैसे हथकंडे और तेज होंगे।
मायावती ने 2007 की तरह 2027 में भी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का लक्ष्य दोहराया।
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