Sutralok / Thu, Jan 29, 2026
प्रयागराज/वाराणसी : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब सुलझने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने पुष्टि की है कि प्रयागराज प्रशासन माफी मांगने को तैयार हो गया है।
योगीराज सरकार के मुताबिक, शंकराचार्य का माघ मेला अचानक छोड़कर वाराणसी चले जाना प्रशासन के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था। अधिकारियों को उम्मीद थी कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा यानी 1 फरवरी के स्नान के बाद ही प्रयागराज से प्रस्थान करेंगे। इसी दौरान उन्हें मनाने की रणनीति बनाई गई थी।

शंकराचार्य के वाराणसी पहुंचने के बाद लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और माघ पूर्णिमा पर ससम्मान संगम स्नान कराने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, शंकराचार्य ने इसके लिए दो स्पष्ट शर्तें रखीं।
विवाद के लिए जिम्मेदार अधिकारी लिखित माफीनामा दें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
माघ पूर्णिमा के स्नान के दौरान चारों शंकराचार्यों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल को पूरी तरह लागू किया जाए।

योगीराज सरकार ने बताया कि शासन के कुछ अधिकारी वाराणसी पहुंचेंगे और शंकराचार्य को प्रयागराज ले जाकर माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान कराएंगे। इस संबंध में औपचारिक ऐलान जल्द किया जाएगा।
इस पूरे विवाद में शंकराचार्य के समर्थन में कंप्यूटर बाबा मौनी अमावस्या से उनके साथ डटे हुए हैं। मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच टकराव हुआ था, जिसके बाद मामला और गरमा गया।

पड़ताल में सामने आया है कि 27 जनवरी की शाम प्रशासन की ओर से विवाद सुलझाने के लिए एक सीक्रेट मीटिंग की गई थी। इस हाई लेवल मीटिंग में तीन बिंदुओं पर सहमति बनी, लेकिन दो अहम मुद्दों पर बात अटक गई।
प्रशासन ने लिखित माफीनामा देने से इनकार कर दिया और सार्वजनिक माफी पर भी सहमति नहीं बन सकी। मीटिंग की पूरी जानकारी रात में ही शंकराचार्य तक पहुंचा दी गई।

चूंकि प्रशासन अपनी गलती मान रहा था, लेकिन उसे लिखित और सार्वजनिक रूप देने को तैयार नहीं था, ऐसे में शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ने का निर्णय लिया। 28 जनवरी की सुबह उन्होंने प्रयागराज छोड़ने का ऐलान कर दिया।
अब इस पूरे मामले पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आगे की रणनीति और अंतिम निर्णय का खुलासा करेंगे।
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