Sutralok / Mon, Feb 2, 2026
लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश के अनुसार सभी राज्य कर्मचारियों को अपनी चल और अचल संपत्ति की जानकारी हर साल मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के उद्देश्य से लागू की गई है।
हालिया समीक्षा में सामने आया कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अब तक यह विवरण अपलोड नहीं किया है। इसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए वेतन रोकने का फैसला किया।

उत्तर प्रदेश में कुल 8,66,261 राज्य कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से 68,236 कर्मचारियों ने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया था। इन्हीं कर्मचारियों पर सरकार ने वेतन रोकने की कार्रवाई की है।
सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि—
"जब तक कर्मचारी मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड नहीं करते, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा।"
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
इस फैसले के बाद कई विभागों में कर्मचारियों के बीच नाराजगी भी देखने को मिल रही है। कर्मचारियों का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों और जानकारी की कमी के कारण कई लोग समय पर विवरण अपलोड नहीं कर पाए। वहीं सरकार का तर्क है कि इसके लिए पर्याप्त समय और अवसर पहले ही दिए जा चुके थे।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि जैसे ही कर्मचारी अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर अपलोड करेंगे, उनकी सैलरी फिर से जारी कर दी जाएगी। साथ ही भविष्य में नियमों की अनदेखी करने वालों पर और सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।
योगी सरकार का यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। हालांकि, इसका असर हजारों कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कितनी जल्दी कर्मचारी नियमों का पालन करते हैं और सरकार आगे क्या रुख अपनाती है।

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